Wednesday, 23 November 2011

चिदंबरम पर मेहरबानी का सबब

ऐसी जानकारी मिल रही है कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में आरोपियों की सूची में अपना नाम आने के बाद चिदंबरम साहब ने तो इस्तीफा दे दिया लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं और उन्हें निर्दोष  सिद्ध करने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा रहे हैं. प्रधानमंत्री महोदय ने स्वयं कहा था कि गठबंधन धर्म निभाने के लिए उन्हें घोटालों की अनदेखी करनी पड़ी है. चिदंबरम साहब के मामले में गठबंधन धर्म कहां आड़े आता है. आरोप लगा है और वे निर्दोष हैं तो जांच करा लेने में हर्ज़ क्या है. लोकसभा की कार्रवाई को दो दिनों तक इस मुद्दे को लेकर बाधित होने देने के पीछे प्रधानमंत्री जी के पास क्या मजबूरी थी. देस के लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं. किसी का सात खून माफ़ और किसी की छोटी सी गलती भी अपराध क्यों. बचाना ही था तो ए राजा और कनिमोझी को क्यों नहीं बचाया. उन्हें बलि का बकरा क्यों बनाया. इस घोटाले में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के नाम भी आये थे. उनकी जांच क्यों नहीं. या तो यह सरकार पूरी बेशर्मी के साथ कह दे कि घोटाला हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है या फिर इसकी निष्पक्ष जांच कराये. इतना बड़ा घोटाला और प्रधानमंत्री को भनक तक नहीं. वाह भाई वाह! देश आपके कन्धों पर आखिर कितना सुरक्षित? आप स्वयं निर्णय करें. 

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